मैं चला हूँ उस पथ पर
मैं चला हूँ उस पथ पर
जहाँ कांटे बिछे हैं यहाँ से वहां तक|
एक रिश्ता बनाया है इस रास्ते से
इसी में जीना मरना है||
मंजिलें तो इस पथ पर मिलेंगी कहीं
रुकुंगा कैसे उन मंजिलों को पाकर |
रास्ते को खोकर,
जिसने मुझे चलना सिखाया ||
बस इंतज़ार है कुछ फूलों का,
जो अनायास ही मिलेंगे कभी
इस शूल भरी राह पे चलकर |
कोई जान से भी प्यारा दोस्त भी मिलेगा ,
दुश्मनी निभाते दुश्मन भी होंगे;
पतझड़ भी मिलेंगे, सावन भी मिलेंगे;
मौसम की तरह बदलते लोग भी होंगे .
रिश्तों के कुछ जोड़ मिलेंगे;
रास्ते के कुछ मोड़ भी होंगे.
कोई मोड़ खुशियाँ दे जायेगा,
कुछ जोड़ टीस भर देंगे |
फिर चल पडूँगा मैं उन्ही कांटो के साथ
जीवन के पथ पर ...
जो साथी बने हैं
जीवन के पथ पर..
और साथ निभाएंगे
मृत्यु की शैय्या तक..

जो साथी बने हैं
ReplyDeleteजीवन के पथ पर..
और साथ निभाएंगे
मृत्यु की शैय्या तक..
chhu gaya dil ko
ReplyDeleteDhanyawaad Sir
ReplyDeleteMan Mera Jogi Hai,
ReplyDeleteBholenath tere pyar ka rogi hain,
kaisa ye path hain jindgi,
Jisne jaisa kiya
wo vaisa bhogi hain