Sunday, August 12, 2012

मैं चला हूँ उस पथ पर

मैं चला हूँ उस पथ पर


  





















मैं चला हूँ उस पथ पर
जहाँ कांटे बिछे हैं यहाँ से वहां तक|
एक रिश्ता बनाया है इस रास्ते से
इसी में  जीना मरना है||
मंजिलें तो इस पथ पर  मिलेंगी कहीं
रुकुंगा कैसे  उन मंजिलों को पाकर |
रास्ते को खोकर,
जिसने मुझे चलना सिखाया ||
बस इंतज़ार है कुछ फूलों का,
जो अनायास ही मिलेंगे कभी
इस शूल भरी  राह  पे चलकर |
कोई जान से भी प्यारा दोस्त भी मिलेगा ,
दुश्मनी निभाते दुश्मन भी होंगे;
पतझड़ भी मिलेंगे, सावन भी मिलेंगे;
मौसम की तरह बदलते लोग भी होंगे .
रिश्तों के कुछ जोड़ मिलेंगे;
रास्ते के कुछ मोड़ भी होंगे.
कोई  मोड़ खुशियाँ दे जायेगा,
कुछ जोड़ टीस भर देंगे |

फिर चल पडूँगा मैं उन्ही कांटो के साथ
जीवन के  पथ   पर ...
जो साथी बने  हैं
जीवन के पथ  पर..
और साथ निभाएंगे
मृत्यु की शैय्या  तक..

4 comments:

  1. जो साथी बने हैं
    जीवन के पथ पर..
    और साथ निभाएंगे
    मृत्यु की शैय्या तक..

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  2. Man Mera Jogi Hai,
    Bholenath tere pyar ka rogi hain,
    kaisa ye path hain jindgi,
    Jisne jaisa kiya
    wo vaisa bhogi hain

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